Wednesday, May 12, 2021

LATEST ARTICLES

कटाक्ष: (तीखे स्वर )

आपके जख्मों पर नमक छिड़कने लगेंगे। आप की नाकामी का ऐसा बखान करेंगे कि आप खुद ही शर्मिंदा हो जाएंगे। फिर चाहे वह हाई स्कूल में फेल होने के बात हो या पहली बार की लड़ाई झगड़ा की बात हो या फिर पहले प्यार की बात हो बस अपने नाते रिश्तेदारों को पता चलने कि देर होती है यही लोग आपके पूरी दुनिया में बखान कर देंगे।

मन पर विराम कैसे लगाएं?

मन की इच्छा पूर्ण करने के लिए वह किसी भी हद को पार कर जाता है। अपनी सीमाएं अपनी मर्यादाओं को लाँघ जाता है। जिससे खुद का चीर हरण करता ही है। साथ ही साथ वह समाज को भी दुष्प्रभाव कि आँच दे जाता है

वर्तमान की नीव भविष्य की सीढ़ी

वर्तमान में किया गया एक प्रयास आपके भविष्य का सुनहरा कल हो सकता है। आपकी मेहनत आपको कहां से कहां, पहुंचा सकती...

प्यार सच्चा है या झूठा

बचपन से सुनते चले आ रहे हैं। प्यार में ऐसा होता है। वैसा होता है। लेकिन जानने की इच्छा यह होनी चाहिए की प्यार में डूबे लोग कैसे होते हैं? क्या सोचते हैं? उनका व्यवहार कैसा होता है?

औरत तेरी यही कहानी

पुरुष की शिक्षा - दीक्षा और सारी हेकड़ी तब निकल जाती है, जब गाली भी औरतों का सहारा लेकर दी जाती है, गुस्सा निकालने के लिए भी मां -बहन का सहारा चाहिए। लाचार !! गाली भी अपनी नहीं बना पाते ।। ?

जिंदगी के अकेलेपन का सफर

वास्तविक सच्चाई यह है कि बस फोन के दिखावटी पन से दुनिया की खुशियां बटोर रही। है लेकिन अंदर से तो बहुत खाली है धीरे धीरे अंदर से कितने अकेले होते जा रहे हैं दूर को रिश्तो को जिनको जानते भी नहीं है। उनका खबर रोज लेते हैं लेकिन जो पास के रिश्ते हैं जो नाजुक पौधे के समान है उन रिश्तो को पानी ही नहीं डाल पाते हैं।

अपने टैलेंट को कैसे पहचाने

जो अपने कैरियर को लेकर सही निर्णय नहीं कर पाते हैं और अपनी हॉबीज को टैलेंट समझ कर अपना समय गुजार देते हैं।

अकेलेपन से(क्यों डरते हैं?)

कहते हैं कि इंसान जितना ही अंदर से टूटा होगा। वह उतनी ही दुगनी मजबूती से आगे बढ़ेगा और हर एक चुनौती जंग की तरह लड़ने के लिए तैयार होगा।

सच व झूठ को कैसे पहचाने

जब तक सच अपने दो चार कदम बढ़ाए गा तब तक झूठ अपने अफवाहों का बाजार गर्म कर देता है। कहते हैं ना जब तक सच अपने घर से निकलने की तैयारी करता है। तब तक झूठ आधी दुनिया घूम चुका होता है।

उम्मीद (HOPE)

जब वह उम्मीद उसके सामने जागृत होती है। और ज़ब वह उम्मीद पर खरा उतरने में खेद व्यक्त करता है। तब वह उम्मीद चकनाचूर हो जाती है। उम्मीद खत्म हो जाती है। वक्त गंभीर बन जाता है।

Most Popular

उलझने (जिंदगी कि )

उम्र के साथ जिंदगी अपने आयाम बदलती रहती है ।कभी दुखो का सिरा मिलता है,तो कभी उलझन में ही गुम हो जाता है ।...

मन की व्यथा – विचारों की कथा

"मन की व्यथा विचारों की कथा  सब तितर-बितर हो जाता है ।। जब अपनों से मिलता है, दुख -दर्द तब पीड़ा असहनीय हो जाता है ।। जिंदगी हर...

मनोरंजन के (पुराने संसाधन)

आज से ठीक 30, 35 साल पहले की दुनिया कुछ और थी और आज कुछ और है । बात यहां पर अगर मनोरंजन से...

बुद्धिमान लोगों की पहचान

आज वक्त ऐसा है कि अगर आप के पास बुद्धि नहीं है तो आप के पास कुछ भी नहीं है । दुनिया मे लोग...

Recent Comments