Monday, March 8, 2021
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मन की व्यथा – विचारों की कथा

मन की व्यथा विचारों की कथा 

सब तितर-बितर हो जाता है ।।

जब अपनों से मिलता है, दुख -दर्द

तब पीड़ा असहनीय हो जाता है ।।

जिंदगी हर मोड़ पर लेती है इम्तिहान

और जीवन खींचतान में गुजर जाती है ।।

एक दूसरे को समझने में उम्र ढल जाती है

अंत मे  हाथ क्या लगता है?

दो गज की जमीन !

जो अपना शयनकच्छ बन जाता है।।

इस  दुनिया में ना आना, अपनी मर्जी से होता है और ना यहां से जाना अपनी मर्जी से होता है । बस इस दुनिया में जीना अपनी मर्जी से होता है ।जिंदगी अपनी होती है। इसको चलाने का ढंग भी खुद का होता है ।अपनी जिंदगी में क्या शामिल करना है ।क्या बाहर निकालना है। यह स्वयं कि सोच पर निर्भर करता है। जिंदगी एक शरीर जैसा होता है । जिसका आभूषण  तथा इसका व्यवहारात्मक हाव -भाव,  स्वम कि व्यवहार्तमाकता मे  धीरे – धीरे झलकता है ।

शरीर का श्रृंगार मनुष्य स्वयं अपनी इच्छाओं के अनुसार करता है। उसे सजाता है, सावरता  है । और फिर  वही श्रृंगार विचारों के आईने में ज़ब देखता है । तब तब उसके चेहरे के साथ-साथ उसके विचारों का व्यवहार भी आईने में दिखता है । कहावत है कि- “जैसी सोच होगी वैसे ही दृष्टि होगी ” और अपनी सोच के आभूषण आप अपने जीवन में संग्रहित करेंगे ।

जीवन का चक्र ऐसे ही चलता रहेगा । अंत में स्पष्ट यही होता है कि जीवन जीना अपने हाथ में होता है ।जीवन की दिशा किस ओर  चलानी है  स्वयं कि सोच पर निर्भर करता है ।स्वयं का विकास अपने हाथ में होता है ।शायद यही तो जिंदगी है!

हर मोड़ पर जिंदगी इम्तिहान लेती है

दुख तकलीफ जिंदगी के इम्तिहान होते हैं ।जो हमेशा स्वयं के द्वारा उत्पन्न किए गए कार्यों से जन्म लेता है ।  जिस तरह से हम हर वक्त हंस नहीं सकते हैं । ठीक उसी तरह हम हर वक्त रो नहीं सकते हैं ।यह सारे मन के भाव होते हैं जो हमारे मन की इच्छाओं पर आधारित होते हैं और समय समय पर इसके रस का स्वाद हम इंसान चखते रहते हैं । दया, परोपकार, करुणा जैसे भाव हमारे अंदर हमेशा विद्यमान होते हैं ।

लेकिन अपने स्वार्थ कारणों की वजह से कभी कभी इंसानी रूप धूर्त चरित्र  ग्रहण करने में संकोच नहीं करता हैं । अनजान बनने का ढोंग करता रहता है जब जिंदगी हमें कांटो और कठिन रास्तों से परिचित कराती है । तब हाथ जोड़कर प्रार्थना करने लगते है कि हे ! प्रभु मैंने यह क्या किया? वह क्या किया? वगैरा-वगैरा….।  कुल मिलाकर मेरा यह अभिप्राय है कि मनुष्य जितना सरल स्वभाव धारण करता है वह उतना ही कुशाग्र होता है अपने वही कर सकता है जिसके अंदर सारे रस विद्यमान होते हैं या  जिसमें सारे रसों का स्वाद चखा होता है उदाहरण तौर पर इस को ऐसे समझ सकते हैं कि जितना इंसान सीधा व सरल स्वभाव का होगा । उसको उसके अपने ही लोग धोखा कर तकलीफ देकर उसकी आंखें खोल देते हैं ।  उसी जगह पर जिस व्यक्ति का सोच विचार मजबूत स्वभाव होगा उसकी अंत  मे विजय होती है ।  और मानव चरित्र का सर्वश्रेष्ठ इतिहास बनकर उभरता है वर्तमान जीवन में कष्ट झेल ता है लेकिन उम्र के पड़ाव के साथ-साथ उसके विचारों की गरिमा तेज होती जाती है उसके विचारों का सम्मान और दूसरों के लिए मिसाल बनकर उभरता है ।

मनुष्य का दोहरा चरित्र

बात यहां पर दोहरे चरित्र की होती है ऐसे मनुष्य अंदर से कुछ और और बाहर से कुछ और होते हैं यह दूसरों के लिए घातक सिद्ध होते हैं ऐसे व्यक्ति के लिए यह मुहावरा सटीक बैठता है कि बगल में छुरी मुंह में राम ऐसे व्यक्ति बोलते कुछ और हैं और करते कुछ और हैं मंशा कुछ और रखते हैं ऐसे लोगों को समझना कठिन होता है लेकिन प्राकृतिक ऐसे व्यक्ति को हमेशा समझ जाती है इसीलिए जब भी इनकी सच्चाई दूसरों के सामने प्रकट होती है तब लोगों में अपना विश्वास ऐसे लोग खो बैठते हैं वह चाह कर भी दुबारा अपना विश्वास कभी दूसरों के अंदर नहीं जगा  पाते हैं अतः इनका जीवन अधिकतम दुख तकलीफ और कांटों से भरा होता है ।

जलनशील की भावना

जलनशील कि भावना प्रत्येक मनुष्य के अंदर कुछ कम या ज्यादा विद्यमान रहती हैं । भावनाओं का घटना बढ़ना  प्रत्येक मनुष्य की परिस्थियो पर निर्भर करता है । उसके स्वम् के विचार ही जीवन का मार्ग प्रशस्त करते हैं ।  परंतु जलन की भावना रखने वाला मनुष्य स्वम को ही नुकसान पहुंचाता है ।  जलन ऐसा भाव है जिसके उत्पन्न होने से शरीर भी सूखने लगता है उसका स्वभाव दुष्ट और ऐंकारी प्रवृति का हो जाता है जलन की वजह से मनुष्य का जीवन में तपाक छल कपट आदि भावों का प्रवेश बढ़ जाता है दूसरों को नीचा दिखाने के चक्कर में स्वयं इतना नीचे गिर जाता है जिसके कारण ऐसे व्यक्ति निंदा का पात्र बनते जाते हैं ।

सीधा व सरल स्वभाव

सीधा व सरल स्वभाव सच्चे व्यक्ति की निशानी होती है ऐसे व्यक्ति करुणा से भरे और परोपकारी होते हैं दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं पशु पक्षियों और मनुष्य से प्रेम करते हैं निस्वार्थ दूसरों की सेवा में अपना योगदान देते हैं झूठ फरेब और धोखा से दूर रहते हैं इनका सुबह निश्चल होता है हर किसी पर भी आसानी से विश्वास कर बैठते हैं कष्ट धोखा भी अगर इनको मिलता है तो यह इतना व्याकुल नहीं होते हैं अपने मन को विराम देकर फिर से प्रेम का इत्र अपने आस पास सभी पर छिड़कने लगते हैं ।  ऐसे व्यक्ति हमेशा अपनी मुस्कान से दूसरों को भी खुशी पहुंचाते रहते हैं ।

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