woman in white and red floral dress standing on green grass field

मनुष्य की फितरत होती है कि जब कोई चीज उसको अच्छी लगती है या कोई चीज उसको प्रभावित करती है, तो वह उसको अपने पास हमेशा रखने के लिए सोचने लगता है। फिर चाहे वह उसके लिए हानिकारक ही क्यों ना हो? उसके नकारात्मक गुणों को अनदेखा कर, अपने मन की इच्छा पूर्ति करने के लिए प्रयासरत हो जाता है। ऐसा ही होता है ज़ब मन पर बस नहीं होता है।

मन की चंचलता, आपको किसी भी खतरे में डाल सकती है। पहचानना होगा उन गुणों को जो आपको खतरे में डालें, इसलिय उन गुणों को पहचान क़र मन से निकाल फेंकना ही स्वयं के लिए बढ़िया होगा। तभी हमारा मन पर वश हो सकता है और अगर आपका मन पर वश हो गया तो सारी इच्छाएं अपने आप तृप्त हो जाएंगी।

मन को वश मे कैसे करें

अब सवाल यह उठता है कि कैसे पता करें कौन से अच्छे गुण हैं? और क्या बुरे गुण हैं? मन पर विराम कैसे लगाएं ? सभी मनुष्य यही सोचते हैं कि उनका मन, उनके वश में है। और वह नकारात्मक गुणों से दूर है। लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही है। काश वास्तविकता में अगर यह सच होता, तो हमारे चारों तरफ स्वार्थीपन के महामारी खत्म हो गई होती।

सच तो यह है कि स्वार्थीपन और मन की चंचलता ने मनुष्य के सद्भाव व सद्गुणों पर काठ की हांडी चढ़ा कर रखी है। मनुष्य आज मन की चंचलता के जाल में फंसता जा रहा है। मन पर विराम कसने की बजाय मन को आजाद छोड़ दिया गया है। जिसके जो मन मे आता है, वह करता है। मन की इच्छा पूर्ण करने के लिए वह किसी भी हद को पार कर जाता है। अपनी सीमाएं अपनी मर्यादाओं को लाँघ जाता है। जिससे खुद का चीर हरण करता ही है। साथ ही साथ वह समाज को भी दुष्प्रभाव कि आँच दे जाता है। इसी आजादी के कारण मनुष्य को बहुत से दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ता है।

मन पर वश है, कि नहीं है।

कुछ छोटी-छोटी बातों से पता किया जा सकता है कि मन वश में है या नहीं है। जैसे अगर उदाहरण तौर पर देखा जाए तो एक मोटे आदमी को पता है कि वह बहुत मोटा हो गया है। लेकिन मन पर वश ना होने के कारण व खाने पीने की इच्छा को मार नहीं पाता है। और वही खाना खा लेता है जिसके कारण उसका ऐसा हाल हुआ है। अपनी शारीरिक विकृति को अनदेखा कर मन की चंचलता में गिरफ्तार होकर एक आदमी दुष्प्रभाव की तरफ बढ़ता जाता है। जिससे उसको खतरा सिर्फ और सिर्फ उसी को है।

अब देखते हैं कि मन को वश मे करने के लिए क्या किया जाए ? मन को वश मे करने के लिए दो तरीके से काम करना लाभदायक है। भगवत गीता में श्री कृष्ण द्वारा उपदेश दिया गया है कि मन को काबू करने के दो तरीके है। पहला तरीका है अभ्यास करें और दूसरा तरीका है वैराग का रास्ता चुने। इन दोनों तरीको से ही मन पर कंट्रोल किया जा सकता है

अभ्यास व वैराग्य से मन को वश मे करना

अभ्यास का यहां पर अर्थ है कि निरंतर प्रयास करना। जब किसी एक कार्य में जुट जाये, तब उसको खत्म करके ही दूसरे कार्य की शुरुआत करें। उसी काम में एकाग्रता दिखाना, मन को विचलित ना होने देना, तब यही मन पर आप की वश ता दिखता है। क्योंकि मन हर पल चंचलता का रूप लेकर हर वक्त भटकता रहता है। एकाग्र मन को स्थिर रखने के लिए उस पर काबू पाना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।

इसलिए मनुष्य को मन पर काबू करने के लिए उसे दृढ़ संकल्प होना चाहिए। अपने दृढ़ संकल्प से ही मन पर काबू लाया जा सकता है। इसका अभ्यास करते रहने से मन की चंचलता कम हो जाती है और अंत में अभ्यास से ही मन पर विजय प्राप्त हो जाती है।

जब मन की चंचलता खत्म हो जाती है। तब मनुष्य द्वारा निश्चित किए गए कार्यों पर विजय प्राप्त हो जाती है। लक्ष्य प्राप्ति पश्चात मन पुनः इंद्रियों द्वारा चंचलता का रूप धारण कर लेता है। मिथ्या, मोह, भोग, विलास मन को फिर से आकर्षित क़र लेती है। मन फिर से चंचलता के जाल में फंस सकता है इसलिए मन को यह समझना जरूरी होगा कि सारी इच्छाएं मिथ्या है, आसार है, भ्रम है।

जब मन सभी तरह की स्थिति से परिचित हो जाता है। तब उसका मोह खत्म हो जाता है। जब मोह खत्म हो जाता है, तब मन की चंचलता का कोई स्थान नहीं रहता है। उसका स्थान शून्य हो जाता है। मन शांत हो जाता है। मन के चेहरे पर प्रसन्नता का भाव हमेशा हमेशा के लिए स्थिर हो जाता है। जीवन का यही सार है।

मन की चंचलता

मन की चंचलता दुखों का कारण है,

एक आंख में आंसू तो दूसरे आंख में घाव है।।

इच्छाएं तृप्त नहीं होती है कभी,

थोड़ी थोड़ी देर में सोती जागती है।।

तभी नभ गगन में विचरण होता है,

तो कभी पत्थरों पर दुख उकेरा जाता है।।

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5 thoughts on “मन पर विराम कैसे लगाएं?”
    1. मुझे बहुत अच्छा लगता है । जब आपको मेरा पोस्ट पसंद आता है । आपके कमेंट पढ़कर मैं बहुत उत्साहित हो जाती हूं ।आपके प्यार और सहयोग के लिए धन्यवाद!

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