person in black shorts walking on beach

सच वह है, जो आज है, आज का जीवन ही सच है। सच को अपनाने वाले लोग कभी धोखा नहीं खाते क्योंकि सच की सोच मे ऐसी शक्ति होती है, कि सच के पास छल, झूठ, धोखा घात के लिए कोई स्थान नहीं होता है। कपटी मनुष्य हो या बुरे आचरण वाला मनुष्य कभी सच के ताप को सहन नहीं कर पाता है। इसलिए अगर सच के पास कभी ऐसे व्यक्ति आ भी जाते हैं तो सब एक-एक करके दूर होते चले जाते हैं। ऐसे लोगों का व्यक्तित्व झूठ पर निर्भर होता है। ऐसे लोगो की भीड़ होने से अच्छा है कि एक सच का व्यक्ति ही साथ हो। इससे यह होगा की जितने भी बुरे व्यक्ति आस पास होंगे, वह सभी एक-एक करके दूर होते चले जायेंगे।

झूठ हमेशा झुंड में चलता है

झूठे लोगों को पास में रखने से अच्छा है कि मनुष्य सच के साथ अकेला चले। झूठ हमेशा नीचाँ दिखायेगा, सच आत्म्विश्वास जागएगा। झूठ का स्वाभाव चंचल होता है और लेकिन अपने पद चिन्हों के निशान बनाकर चलता है। झूठ हमेशा भीड़ का सहारा लेता है । झूठ का स्वभाव गुस्सैल होता है। वह इतनी तेजी से चलता है कि जब तक सच अपने दो चार कदम बढ़ाए गा तब तक झूठ अपने अफवाहों का बाजार गर्म कर देता है। कहते हैं ना जब तक सच अपने घर से निकलने की तैयारी करता है। तब तक झूठ आधी दुनिया घूम चुका होता है। सच का स्वभाव शांत रहता है। वह धीरे धीरे चलता है। लेकिन जहां से वह चलता है, अपने पद चिन्हो के निशान छोड़ कर चलता है। झूठ का स्वभाव गुस्सैल होता है। वह इतनी तेजी से चलता है कि जब तक सच अपने दो चार कदम बढ़ाएगा तब तक झूठ अपने अफवाहों का बाजार गर्म कर देता है। कहते हैं ना जब तक सच अपने घर से निकलने की तैयारी करता है, तब तक झूठ आधी दुनिया घूम चुका होता है।

झूठ माहौल बिगड़ता है

आजकल यह धारणा आम हो गई है कि झूठ के बिना कोई काम नहीं हो सकता है । जबकि सच तो यह है झूठ ने अपने पैर सभी जगह फैला दिए हैं। धीरे-धीरे मनुष्य की आदत बन गई है। झूठ के पास धोखा शर्मिंदगी नकारात्मक चीजों का वास होता है। फिर भी मनुष्य झूठ को अपने आसपास रखता है। झूठ को सबसे बड़ा खतरा सच से होता है। झूठ सच से हमेशा छिपता छुपाता रहता है। इन सब चीजों से ज्ञात मनुष्य फिर भी झूठ के चक्रव्यूह में फंस जाता है। भय झूठ का जन्मदाता होता है और भय का अंत सिर्फ और सिर्फ सच के हाथ में होता है । झूठ से किसी का भला नहीं हो सकता है। झूठ कोई थोड़ा बहुत नहीं होता है। झूठ की कोई मात्रा व सीमा नहीं होती है। झूठ, झूठ होता है जो कभी सत्य नहीं हो सकता है । झूठ हंसी खुशी माहौल को भी बिगाड़ सकता है।

सच और झूठ क्या होता है

सच बोलना कठिन के साथ-साथ इतना कड़वा हो जाता है कि कुछ लोगों का कहना होता है कि सच और झूठ को दूध में पानी की तरह मिलाकर जिंदगी चलानी होती है नहीं तो जिंदगी जीना दूभर हो जाएगा लेकिन क्या तर्क करके उचित होगा। क्या सच और झूठ एक ही जगह विद्यमान रहकर विपरीतार्थक तर्कों का जवाब होता है। आज का विषय है कि मनुष्य दूरी जिंदगी क्यों जीता है फिर चाहे पुरुष हो या महिलाएं सच और झूठ के शहर में ऐसे हंसते हैं जैसे मकड़ी के जाल में कोई कीड़ा मकोड़ा फंस जाता है। सच के जीवन जीना अत्यंत कठिन होता है लेकिन अगर दृढ़ संकल्प ले लो सच के साथ ही देना है तो जिंदगी के कई कठिन रास्ते आसान हो जाते हैं। हो सकता है कि सच के मार्ग पर इक्का-दुक्का लोग आपके साथ हो, लेकिन सच के साथ जीवन जीना, सभी डर और भय का अंत होता है।

झूठ को पहचानने का आसान तरीका

झूठ व्याख्या करता है

हर झूठ बैठे का सहारा लेता है वह कभी कम शब्दों का सार नहीं होता है वह तब तक बोलता जाता है जब तक सामने वाले को झूठ के जाल में फंसा नहीं लेता है

झूठ स्वार्थी होता है

झूठ बोलने वाले मनुष्य स्वाद से भरपूर होते हैं झूठ में मैं का भाव होता है झूठ बाहर से सुंदर होता है झूठ शब्दों से अलंकृत होता है और अहम का भाव नहीं होता है और पल पल अपना रंग बदलता है।

झूठ मीठा व सुविधाजनक होता है

झूठ शहद की तरह मीठा होता है झूठ सुविधाएं से पढ़ पूर्ण होता है जबकि सच तो यह है कि झूठ वास्तविकता से परे होता है

झूठ अनिश्चितता का भाव पैदा करता है

झूठ अनिश्चितता का कारण होता है झूठ का स्वभाव अंत में दुख और हास्य का पात्र बनता है झूठ बहुत से दुखों का कारण बनता है

झूठे व्यक्ति मासूमियत का चोला ओढ़े रहते है

झूठे व्यक्ति मासूमियत का ढोंग रचते हैं सबसे बड़ी पहचान यही होती है कि उनकी आंख में हमेशा आंसू भरे रहते हैं जब उनका झूठ का पैंतरा काम नहीं आता है तो सत्य को बदनाम करने के लिए गिरगिट की तरह रंग बदलकर आंसुओं की नदियां बहाते हैं।

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2 thoughts on “सच व झूठ को कैसे पहचाने”

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