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तो आज का टॉपिक इन किशोरों के लिए है जो अपने कैरियर को लेकर सही निर्णय नहीं कर पाते हैं और अपनी हॉबीज को टैलेंट समझ कर अपना समय गुजार देते हैं। सबसे पहले यह समझना होगा कि जिंदगी, हर एक चीज करने का सही समय देती है। जैसे कि बचपन खेलने कूदने व पढ़ाई करने का समय होता है। किशोर व्यवस्था में कैरियर को सही दिशा की तरफ मोड़ने का समय होता है और जवानी टैलेंट को प्रयास व कठोर परिश्रम करके उसको निखारने का समय होता है। कैरियर के रूप में जो बीज बोया जाता है। वह परिपक्क उम्र के पड़ाव में उसका फल रुपया, पैसा, नाम, शोहरत के रूप में मिलता है।

सभी के पास कुछ ना कुछ हुनर होता है

दुनिया में लाखों करोड़ों लोग होते हैं। कहते हैं सभी लोगों में कुछ ना कुछ टैलेंट होता है। ईश्वर सबको कुछ न कुछ हुनर देता है। तो क्या यह हुनर पैदाइशी हो जाता है? हम जो अपने आसपास के माहौल को देखते हुए पलते बढ़ते हैं। तो जाहिर सी बात है, उस चीज में अपने आप दिलचस्पी बढ़ती जाएगी या यूं कहें कि वह हमें विरासत के रूप में मिल जाती है। उदाहरण के तौर पर देखें तो एक परिवार गाने का हुनर रखता है। तो उस परिवार का बच्चा भी उस हुनर से वाकिफ हो जाएगा। उसको भी वह चीज आ ही जाएगी।

क्या टैलेंट प्रोफेशन बन सकता है

ऐसे रुचियां बहुत से हैं जो दूसरों को देखकर यह शौकिया तौर पर अपने अंदर पनपने लगते हैं। तो अब समझने वाली बात यह है, कि क्या वह टैलेंट प्रोफेशन बन सकता है या केवल इंटरेस्ट बनकर हॉबी में जुड़ जाएगा। तो अब समझने वाली बात यह है कि क्या वह हुनर भविष्य में यह जीविका चलाने की रीढ़ बन पाएगा। क्योंकि हमारे जैसे, हमसे बहुत अच्छे, इस क्षेत्र में नाम, शोहरत पहले से ही कमा चुके हैं। हम तभी इस इस मुकाम को हासिल कर सकते हैं। जब उन लोगो से बहुत बेहतर होगे। उनसे एक कदम आगे होंगे। तभी जिंदगी की रेस में आगे बढ़ पाएंगे। किसी भी क्षेत्र को अपना कैरियर बनाने से पहले इस बात की तसल्ली कर लेनी चाहिए कि उसका टैलेंट, उसका कैरियर, य प्रोफेशन उसको आगे मुकाम तक ले जाएगा। क्या उसका काम समाज में पहचान दिला पाएगा। क्या उसको पैसे के साथ-साथ आत्मिक सुकून दे पाएगा। क्या वह उसका वही काम है, जिसको करने से वह कभी ऊबता नहीं है।

सबसे बड़ा प्रश्न तो यह उठता है कि जो किशोर बच्चे होते हैं। वह सबसे ज्यादा अपने कैरियर को लेकर कंफ्यूज होते हैं। उनको भविष्य में क्या करना है? उनका किस प्रोफेशन को चुनना है। उनको समझ में नहीं आता है। क्योंकि उनको लगता है कि वह सब कुछ कर सकते हैं। उनको सब कुछ आता है। अपने टैलेंट और हॉबीज में अंतर नहीं कर पाते हैं। इंटरेस्ट और टैलेंट में अंतर करने में असमर्थ हो जाते है। जिसकी वजह से वह कंफ्यूज हो जाते हैं। और अपना कीमती समय गंवा देते हैं ।

किशोर बच्चे नई उड़ान भरने के लिए तैयार होते हैं। नया खून, नई उर्जा, नए विचारों के साथ हर क्षेत्र में अपना परचम लहराना चाहते हैं। उनको ऐसा लगता है कि जैसे वह सब कुछ कर सकते हैं। इसी वजह से वह अपने कैरियर को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं। और कैरियर को गति प्रदान करने के लिए उनके पास विकल्प के तौर पर तीन चार इंटरेस्ट भी तैयार रहते हैं। ज्यादातर सोच यह होती है कि अगर किसी भी क्षेत्र में असफल हुए, तो दूसरा विकल्प उनके पास हमेशा तैयार रहता है। लेकिन वह यह भूल जाते हैं कि जो समय अपना इंट्रेस्ट के पीछे गुजार देते हैं। तब टैलेंट को निखारने के लिए वह अपना कीमती समय कहां से लाएंगे। इसी तरह से कुछ लोग गलत निर्णय या सही गाइडलाइन नहीं मिल पाने की वजह से जिंदगी की राह में पिछड़ जाते हैं।

क्या अंतर होता है इंटरेस्ट और टैलेंट में

इंटरेस्ट – इंटरेस्ट वह भाव है जो मन के हिसाब से बनता और बिगड़ता रहता है। मन कभी स्थाई नहीं हो सकता है। इंटरेस्ट का आधार मन होता है। मन इंटरेस्ट पर काबिज होता है। समझने वाली बात यह है कि जब तक मन किसी काम में इंटरेस्ट लेता है। तभी तक वह इंटरेस्टिंग काम होता है। जहां एक बार भी उस काम से मन हट गया तब वह काम रुचिकर नहीं होता है। मन इंटरेस्ट के हिसाब से चलता है और कभी-कभी यह दिशा में बदलाव करता रहता है। मन विचलित होता रहता है। इसीलिए ज्यादातर काम मन के हिसाब से चलता है और उसके जरिए किसी भी तरह के काम को अंत तक पहुंचाना कठिन हो जाता है।

टैलेंटटैलेंट वह गुण होता है जिसमें निश्चिता का भाव होता है। टैलेंट तभी निखर कर आता है। जब काम में लगातार कठिन परिश्रम होता रहता है। जब कभी मन में या भाव आए के टैलेंट को अंजाम तक पहुंचाना है। तब समझ जाएये कि आपका यही टैलेंट आपको आगे तक ले जाएगा। तब आप किसी भी तरह की आलोचनाओं को नजरअंदाज करना सीख जाएंगे। यही टैलेंट अनेक बाधाओं को पार कर आगे बढ़ता है। अपनी स्किन को बढ़ाकर जानकारियों को संग्रह करने लगता है उसकी सोच का दायरा बढ़ जाता है ज्ञानी अपने आप को आगे बढ़ाता है आप को सही दिशा की तरफ ले जाता है। टैलेंट अनेक बाधाओं को पार कर गुणों का खजाना बन जाता है। जिसकी दुनिया कद्र करती है।

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3 thoughts on “अपने टैलेंट को कैसे पहचाने”

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