people sitting on embankment and enjoying sunny day

डिप्रेशन आजकल एक ऐसी बीमारी है ।जिसका हव्वा बना हुआ है । जिसे देखो उसे डिप्रेशन की बीमारी से जूझ रहा हैं। डिप्रेशन क्या है ? कैसे होता है ? क्यों होता है ? मेरा मानना है कि डिप्रेशन दो तरह का होता है। एक आम डिप्रेशन होता है और दूसरा गंभीर डिप्रेशन होता है ।

डिप्रेशन कोई महामारी नहीं होती है कि जिसे छूने से लग जाती है । डिप्रेशन एक नकारात्मक भाव है जो हमारे मन के अंदर उत्पन्न हो जाता है । उस भाव का विनाश करने में लंबा समय लग जाता है । जितना समय उस भाव को विनाश करने में लगता है या जितना समय हम उस नकारात्मक भाव में व्यतीत करते हैं । वही वक्त हमारा डिप्रेशन काल होता है ।इस दुनिया में डिप्रेशन दो तरह के लोगों को होता है । एक वह लोग जो बहुत महत्वकांक्षी होते हैं । दूसरे वह लोग जो यथार्थवादी होते है।

महत्वकांक्षी लोगों का डिप्रेशन

अगर कोई मनुष्य किसी इच्छा के प्राप्त के लिए दिन रात मेहनत करता है और अगर वह इच्छा उसको प्राप्त नहीं होती है । तब वह खुद को उसका जिम्मेदार समझने लगता है। वह हीन भावना से ग्रसित होने लगता है । दूसरे की तुलना स्वयं से करने लगता है ।दूसरे की सफलता उसकी असफलता को दर्शाने लगती है जिसके कारण धीरे-धीरे उसके मन में नकारात्मक भाव उत्पन्न हो जाता है वह स्वयं के लिए खेद उत्पन्न होने लगता है ।उसके जीवन कि असफलता उसको धीरे-धीरे डिप्रेशन की तरफ धकेलने लगता है दुख का कारण स्वयं को समझना ,सबसे बड़ा डिप्रेशन होता है । ऐसे मनुष्य को डिप्रेशन से निकलने में बहुत समय लग जाता है ।कभी कबार उसे दवा पानी या दूसरों की मदद की आवश्यकता पड़ जाती है क्योंकि ऐसे व्यक्ति धीरे-धीरे डिप्रेशन की खाई में गिरते जाते हैं और जीने की इच्छा को भी खत्म करने लगते हैं ।

ऐसे डिप्रेशन वाले व्यक्ति स्वयं को अकेला पाते हैं। सबके होने के बावजूद भी उन्हें अकेला महसूस होता है ।अकेले बैठना पसंद करते हैं ।अंधेरे में रहना पसंद करते हैं। किसी से बात करना पसंद नहीं करते ।एक ही बात को लेकर व सोच कर धीरे-धीरे डिप्रेशन मे घिरने लगते हैं । ऐसे व्यक्तियों का दिल इमोशन से भरा होता है । वह बहुत ही ज्यादा इमोशनल ही होते हैं ।

स्वयं पर विश्वास की कमी होती जाती है । ज्यादातर दूसरों पर आश्रित होते है । ऐसे व्यक्ति इमोशनली बहुत कमजोर होने की वजह से जिंदगी के थोड़े दुख तकलीफ से ही बहुत जल्दी टूट जाया करते हैं ।

यथार्थवादी लोगों का डिप्रेशन

दूसरे तरह के व्यक्ति बहुत हट्टी व अड़ियल होते हैं । ऐसे लोग डिप्रेशन में कम घिरते हैं । यथार्थ में जीने वाले लोग हर परिस्थिति का सामना करने वाले लोग होते हैं । जिंदगी मैं आने वाली हर परिस्थिति का ,चुनौती का सामना डटकर करते हैं ।

अच्छा कभी आपने सोचा है कि गांव में जो लोग रहते हैं । आखिर उनको डिप्रेशन क्यों ना के बराबर होता है ।आखिर वह भी तो हाढ़ माँस का मनुष्य है ।उसके अंदर भी सभी मनुष्यों कि भांति भावनाएं व संवेदनाएं होंगी । आखिर उसका डिप्रेशन ना के बराबर क्यों होता है ।

किसान जो दिन रात मेहनत करता है ।अपने खेत में लगा रहता है ।आखिर ऐसे लोगों को डिप्रेशन क्यों नहीं होता है ? ?अगर यह सोचते हैं कि उनको डिप्रेशन नहीं होता है तो यह गलत है। उनको भी डिप्रेशन होता । लेकिन उनका डिप्रेशन वह खुद ही स्वयं दूर कर देते हैं ।

उन्हें खुद ही नहीं पता चल पाता है कि वह डिप्रेशन में है । फिर वह स्वयं उसी डिप्रेशन से बाहर निकल आते हैं । किसानो के पास इतने काम होते हैं कि उन्हें डिप्रेशन जैसी बीमारी के लिए वक्त नहीं मिलता । अच्छे विचार होते हुए कोई भी मनुष्य ,डिप्रेशन में नहीं जाता पाता है कि वह डिप्रेशन में होते हैं। दिन रात खेतों के बारे में सोचना ,बीजों के बारे में सोचना ,पाने के बारे में सोचना ,कैसे फसल उगाना है ? कैसे पेड़ों को खाद देना है ?इसी के बारे में सोचना, अपने काम के प्रति इतना लगाओ रहता है कि अगर वह उसमें दुखी भी होते हैं तो उसका हल वह स्वयं निकाल लेते हैं

लोगों से बात करते , अपने आस-पड़ोस का हाल चाल लेते हैं, एक ही दिन में ना जाने कितनी बार खेतों के चक्कर लगाते हैं ।बार -बार के चक्कर लगाने से वह इतने थक जाते हैं कि उन्हें डिप्रेशन का एहसास भी नहीं होता है । कि वह डिप्रेशन में है। डिप्रेशन क्या है ? वह सोच जो हमारे अंदर भरी होती है । हमें दुख का एहसास दिलाती है कि हम दुखी हैं ।लेकिन अगर मनुष्य को दुख का भी शोक मनाने का समय ना मिले तो वह कैसा दुखी होगा ।वह अपने काम में इतना बिजी होगा कि उसे किसी चीज की फुर्सत ही ना होगी इसीलिए मैं कहती हूं किसानों या गरीब आदमी जो दिन रात रोटी रोजी रोटी की मेहनत करता है उसको डिप्रेशन नहीं होता है ।क्योंकि वह दिन रात अपनी भूख मिटाने की कोशिश करता रहता है और जब उसकी भूख मिट जाती है तो उसका डिप्रेशन भी खत्म हो जाता है।

धीरे-धीरे डिप्रेशन नकारात्मक सोच में जाता है ।इसीलिए हमेशा अपने दिमाग को उलझाए रखना चाहिए किसी ना किसी काम में बिजी रहना चाहिए ।अपने दिमाग को हमेशा सकारात्मक सोच से भरे रहना रखना चाहिए । सकारात्मक सोच ही नकारात्मक भाव को मिटा सकता है। आपकी सकारात्मक सोच सारे डिप्रेशन का हल है।

प्राकृतिक के करीब होना चाहिए

डिप्रेशन हमारे मन के अंदर बैठा होता है ।आधा तो वह हमको वहीं पर मार देता है। जब हम सोचते हैं कि हम दुखी हैं ।स्वॅम को कोसने लगते है । नकारात्मक भाव से ऐसे घिर जाते हैं । तनाव इतना बढ़ जाता है कि जैसे जीने की इच्छा खत्म हो जाती है ।अगर इस भाव से नहीं निकल पाए तो धीरे-धीरे और उस से ग्रसित होने लगते हैं ।इससे अच्छा है कि ,हमें अपने आपको, अपने समय को, इतना बिजी कर दें कि हमें फुर्सत ही ना मिले सोचने कि हम क्यों दुखी है? अपने काम से इतना प्यार करें कि हमें कोई नकारात्मक भाव अपने गरिफ़्त में ना ले सके।

प्राकृतिक के पास सारे उपाय है । जब कभी डिप्रेशन में घिर जाए तो ज्यादा से ज्यादा समय प्राकृतिक में बिताना चाहिए। पेड़ ,पौधे, फूल, बगीचे स्वच्छ मन की अनुभूति एहसास दिलाते है । पेड़ पौधों की देखभाल करने से सारे बुरे विचार मर जाते हैं ।आपकी चिंता का भी नष्ट हो जाता है और आप क्या सारा ध्यान उनको हरा-भरा करने में लग जाता है ।धीरे-धीरे आपके अंदर भी सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है ।प्राकृतिक के पास हमारे सभी सवालों का जवाब होता है ।

खाली दिमाग शैतान का घर

स्थिति परिस्थिति चाहे जैसे भी हो हमें अपने अंदर पॉजिटिव एनर्जी को बनाए रखना चाहिए वह कहते हैं ना खाली दिमाग शैतान का घर होता है । इसीलिए अपने दिमाग को हमेशा किसी ना किसी चीज में उलझाये रखना चाहिए। किसी ना किसी काम में हमेशा व्यस्त रहना चाहिए ।सबसे अच्छा तरीका है कि आप जितने प्राकृतिक के करीब होंगे उतने ही आपके अंदर सकारात्मक सोच बढ़ेगी ।इसलिए हमेशा स्वयं को प्राकृतिक के करीब रखिए।

पेड़ पौधों से लगाव हमेशा बना के रखिए ।यह आपको चेहरे की खुशी के साथ-साथ मन की खुशी भी देते हैं ।अपनी ठंडी हवा से उलझे दिमाग को शांत करते हैं।

Disclaimer – यहां पर लिखी सभी post किसी भी धर्म, मानवता के विपरीत नहीं है। यह केवल सिर्फ मेरे विचार हैं। जो केवल reader को अपने विचारों से अवगत कराना है। मेरे विचारों से सहमत होना या ना होना यह उनके विचारों पर निर्भर करता है। यहां जो भी कंटेंट है उसके सारे copyright, neetuhindi.com के हैं।

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