ringed plover, bird, animal

बात विचारों की है तो मेरे विचार से इस दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं । पहले वह लोग जो अपना विचार स्वयं प्रस्तुत करते हैं और दूसरे वह लोग जो दूसरों के विचारों का अनुसरण करते हैं । मेरे विचार से विचारों का आदान प्रदान करना सामाजिक बुद्धि को त्रीव गति प्रदान करना है। आदान-प्रदान से सामाजििक दायरा बढ़ता है । अब यहां पर ध्यान देने की बात यह है कि विचार करने वालों की संख्या कम होती है और विचारों का अनुसरण करने वालों की संख्या अधिक होती है । अब विचारों का आदान-प्रदान हो तो सहजता से जाता है किंतु बिना सोचे समझे किसी विचारों का अनुसरण कर लेना घातक सिद्ध होता है । इसका हर्जाना उन्हें भविष्य में भुगतना पड़ता है । देखिए विचार दो तरह के होते हैं अच्छा विचार व बुरा विचार ।

  1. अच्छा विचार

अच्छे विचारो का समावेश वह होता है । जिस के अनुसरण करने से जीवन की कायाकल्प बदल जाती है । मन शांति की तरफ प्रगति करता है । विचारों में शुद्धिकरण होता है । अपने विचारों की महत्वता को जगाता है । आत्मविश्वास को बढ़ाता है ।जीवन के मार्ग को सच्चाई की तरफ ले जाता है । स्वयं की सोचने समझने की शक्ति, पहले से ज्यादा और भी प्रकाशित करता है । वास्तविक जीवन से परिपूर्ण होता है ।कर्म आधारित होता है।

2. बुरा विचार

बुरा विचार वह होता है, जो बुरी संगत से उत्पन्न होता है । बुरी संगत के विचारों से जो प्रभावित होता है ।बुरे विचार सोचने समझने की शक्ति को बिसरा कर देते हैं । यह समाज हितकर नहीं होता है । बुरा विचार स्वार्थ बनकर स्वार्थी जीवन की जागृत में रुचकर रहता है । बुरे विचारों की खासियत यह होती है कि वह अपने विचारों का दम्भ आसमान की ऊंचाई तक रखते हैं इनके विचार कर्णप्रिय से शुरू होकर स्वार्थ पर अटक जाते हैं जो कभी भी हितकर नहीं होते है । बुरे विचार आडंबर ओ से भरा होता है।

विचार ही जीवन की दिशा और दशा को निर्धारित करते हैं

विचार कहते हैं कि इंसान के विचार ही उसके जीवन की दिशा और दशा निर्धारित करते हैं । विचार ही किसी के जीवन को खुशियों से भर सकते हैं या किसी के जीवन को कष्टों के पथ दे सकते हैं। बहुत से ऐसे लोग होते हैं ।जो दूसरों के विचारों पर इसलिए निर्भर रहते हैं ताकि उन्हें ईश्वर की प्राप्ति हो सके । सकारात्मक सोच को अपना सके ।

अपने अंदर सकारात्मक विचार उत्पन्न कर सकें । विचार उस फूल की तरह होता है जिसकी उत्कृष्ट खुशबू चारों तरफ फैल जाती है ।और उसकी महक से मन को शांति जीने का उत्साह प्रदान करती है । नई ऊर्जा का संचार करती है । मन की सोच को बदलने की क्षमता रखती है । बाद में वही फूल जब दूषित हो जाता है या मुरझा जाता है, तो उसके दूषित गंध से दूसरे विचारों में नकारात्मक सोच झलक ने लगती है किसी को भी दूषित गंध बर्दाश्त नहीं होती है इसीलिए जब भी मनुष्य उसके बगल से गुजरता है । तो वहा से अपने नाक से सिकुड़ते हुए निकल जाता है वहां पर उत्कृष्ट विचार तब मायने रखता है जब किसी के मन में यह विचार आता है कि दूषित चीज को कैसे वहां से हटाया जाए

विचारों का आदान-प्रदान बुद्धि से होना चाहिए

विचारों का आदान-प्रदान तब तक होना चाहिए जब तक वह विचार स्वयं से या मानव कल्याण से जुड़ा हो । जहां विचार मे अहम की भावना पनपने लगती है । तब उस जीवन में धोखे और अविश्वास जैसी भावनाओं का जन्म होने लगता है । विचार का होना अति महत्वपूर्ण है क्योंकि विचारों से ही जीवन चलता है । वह विजय विचार है जिसे दूसरा के कष्ट भरे जीवन को बदलने की क्षमता रखता है । वह विचार अपने सकारात्मक ऊर्जा के कारण अपने आसपास दूषित वातावरण कलयुग दोस्तो ( झूठ, पापा ,असंतोष ,स्वार्थ अदि ) को अपनी सादगी की सुंदरता से जीवन को सुख की अनुभूति कराये ।

क्योंकि सादगी के नजदीक सत्य का बसेरा होता है । कहते हैं ना कि सत्य सभी का एक ही होता है और झूठ सभी के मन के मैल से उत्पन्न विचार होते हैं । जिनसे हमें कोसों दूर रहना चाहिए । इसीलिए किसी के विचार को आत्मसात करने से पहले सत्य की अनुभूति होनी आवश्यक है । अपने विचारों में सत्यता होनी चाहिए क्योंकि मेरा मानना है कि भीड़ में मंद बुद्धि भेड़ चलते हैं, शेर नहीं । ठीक उसी तरह विचार वही पसंद आते हैं जिनके विचार स्वयं से उत्पन्न हो , जिन के विचारों में शीतलता हो ,जिन के विचारों में सादगी होती है । जिनके विचार में सत्य होता है ।

विचारों का अनुसरण अंध भक्त की तरह

आज हम बात उन लोगों की करते हैं । जो बिना सोचे समझे दूसरे के विचारों को अपने जिंदगी में अंध भक्तों की तरह चल पड़ते हैं । दुनिया में ऐसे तादातों की कमी नहीं है जो दूसरों के विचारों को हरी झंडी दे देते हैं । अपना तर्क रखे बिना कैसे आप किसी के विचारों से सहमत हो सकते हैं । कैसे उस भीड़ में शामिल हो सकते हैं जिनका चरवाहा खुद अपने रास्ते से भटका हो।

बात उन बाबाओं कि हो या ढोंगी वक्ताओं का, कुछ लोग उस भेड़ों की तरह उनके रास्ते पर चले जाते हैं जिनके मंजिल खाई होती है ।उदाहरण के तौर पर मैं आसाराम बापू का जिक्र करती हूं ।

मैंने स्वयं देखा है कैसे पहले लोग उनके विचारों से प्रभावित हुए ।फिर कैसे भगवान का दर्जा देकर उनकी पूजा-अर्चना करने लगे ।फिर उनकी कैसे रथयात्रा निकालने लगे । यहां पर बात विचार की करती हूं ,लाखों करोड़ों की संख्या में उनके भक्त थे ,उनकी पूजा-अर्चना करते थे । फिर एक दिन पता चलता है उनके बाबा तो यौन शोषण में लिप्त नाबालिक बच्चों के बाल बलात्कारी थे । विचारों से प्रभावित होना समझ में आता है । पर कैसे उनके मंदबुद्धि बनकर अपने इष्ट देवता का स्थान दे देना यह मतलब समझ में नहीं आता है । मूर्खता बस यही होती चली जाती है कि कैसे एक दूसरे को देख कर तथा उनके विचारों से प्रभावित होकर अपनी अक्ल पर पत्थर रख लेते हैं।

विचार वह जो जीवन को धन्य करें

जो विचार भीड़ की तरह सोचने लगते हैं । बिना विचार किए, बिना सोचे समझे चुंबक की तरह खींचे चले जाते हैं। साथ में उठते बैठते और हां में हां मिलाने लगते हैं । दूसरों के विचार का अनुसरण करने लगते हैं। ठीक है, कोई गलत बात नहीं है ।लेकिन बिना तर्क रखे बिना विचार को समझे उनका अनुसरण करना यह गलत है । विचार उच्च होना चाहिए ।जो आपके जीवन में दूसरे के जीवन को धन्य करें ! परोपकार करें सत्य पथ का निर्वाह करें दूसरों को सत्य की सीख दे अपने जीवन से दूसरों को प्रभावित करें।

Disclaimer – यहां पर लिखी सभी post किसी भी धर्म, मानवता के विपरीत नहीं है। यह केवल सिर्फ मेरे विचार हैं। जो केवल reader को अपने विचारों से अवगत कराना है। मेरे विचारों से सहमत होना या ना होना यह उनके विचारों पर निर्भर करता है। यहां जो भी कंटेंट है उसके सारे copyright, neetuhindi.com के हैं।

 178 total views,  3 views today

100% LikesVS
0% Dislikes
One thought on “विचार (मोटिवेशनल जिंदगी)”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *