woman looking at sea while sitting on beach

कभी-कभी ऐसा दिन आता है। जब ढेर सारी निराशाएँ आप के इर्द गिर्द घूमती है। चारो तरफ से आपको घेर लेती हैं। कुछ अच्छा नहीं लगता है। खुद से ही इतने सवाल होते हैं जिनका जवाब देना मुश्किल होता है। मानो लगता है कि सारी असफलताओं का सामना मेरे सिवा किसी ने नहीं किया होगा। जितना दुख मैंने झेला है, शायद ही किसी ने झेला होगा। हालांकि ऐसा ख्यालात उदासी और तनाव का सबब बनते है। लेकिन सच्चाई यह होती है कि सब कुछ जानते हुए भी हम दुखी रहते है। हम मनुष्य अपने द्वारा किए गए कर्मों से कुछ ज्यादा ही उम्मीद लगा कर बैठ जाते हैं और जब परिणाम स्वरूप फल नहीं मिलता, तब निराशा या सफलताओं का कोहरा दिलो-दिमाग पर छाने लगता है। और जिंदगी में जितनी असफलताओं का सामना किया होता है। वह सब एक-एक करके आंखों के सामने फ्लैश होने लगता हैं। और हम हाथ पर हाथ रख के और भी चिंता उदासी में डूब जाते हैं।

असफलता के गणना करना

यह वह दिन होता है । जब अपने द्वारा किए गए कार्यों के असफलता की गणना करते हैं। आज मेरा वही दिन है। आज निराशा से मेल और उम्मीद को खोने का दिन है । सुबह से शाम हो गई है। अब रात होने को आई है। लेकिन दिमाग है कि शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। मैं अपने दिमाग को निराशा की सोच से हटाना चाहती हूं। इसलिए मैंने सोचा, अपने इस निराशा-भावपूर्ण दिन को भी बांटा जाए। अपनी निराशाओं को तितर-बितर किया जाए। निराशाओं को टुकड़े-टुकड़े कर कागज पर उकेरा जाए और मेरा मन की हलचल को शांत किया जाए। अच्छी हो अगर सुबह का स्वागत मुस्कुराते हुए किया जाए।

अपनी इच्छा को महत्व देना

मुझे गार्डनिंग का शौक है। शाम को ढेर सारा वक्त अपने पेड़ पौधों के साथ बिताती हूं। उनकी देखभाल करती हूं खाद्य-पानी डालती हूं और आज तो पेड़ पौधों के बीच में घंटों समय बिता दिया था । लेकिन फिर भी कुछ अच्छा नहीं लग रहा था। जब काम मन मुताबिक नहीं होता है। तो निराशा हाथ लगती है तब अपने द्वारा किए गए कार्यों पर चिंतन करने के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता है। दिनभर उसी पे माथापच्ची करिये । फिर सोचते रहये, जवाब कुछ नहीं मिलता है। जैसे उलझे हुए धागों का सिरा नहीं मिलता है वैसे ही मेरी सोच से सान्तवना नहीं मिलता है। लेकिन इन सबके बीच अपनी इच्छा को महत्व देकर इस निराशा को दूर भगा सकते हैं लेकिन कुछ भी हो आज का दिन दोपहर निराशा के नाम था।

कैसे निराशा व उदासी को दूर भगाएं

लेकिन मेरे पास एक तरकीब है। जिससे निराशा, उदासी, और असफलताओं जैसी चीजों को भुलाया जा सकता है । हर मनुष्य के अंदर दो-तीन खूबियां होती हैं। जिन्हें करने से उन्हें खुशी मिलती है। फिर चाहे वह पेंटिंग हो, गार्डनिंग हो, राइटिंग हो वगैरा-वगैरा । कुछ तो इंसान का शौक होता है।

जिसे करने से वह सारे गम को भुला देता है। जहां से उसको सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। आगे बढ़ने का रास्ता मिलता है। बस कभी-कभी हम समझ नहीं पाते कि हमें क्या अच्छा लगता है। लेकिन कुछ तो ऐसा होता है जिसे करने से हमें खुशी मिलती है। जिससे अपनी उदासी, अपनी नाकामी को भुला सकता है। क्योंकि मेरा मानना है की जब तक उदासी से उबर नहीं पाएंगे तब तक आगे बढ़ने की तरफ सोच नहीं पाएंगे, तो सबसे पहले अपने मन को शांत करना होगा ।

यह मेरा मानना है कि मन को शांत अपने सिवा कोई नहीं कर सकता है । इसलिए वह काम करिए जिससे आप ख़ुशी मिले, और अपने असफलताओं को भूल कर, सफलता की तरफ कदम बढ़ाएं। एक बार फिर से पुर जोर से कोशिश करें।

निराशा से उम्मीद की तरफ

जहां तक मैंने अनुभव किया है। कोई भी मनुष्य ऐसा नहीं है जिसको असफलता का सामना ना करना पड़ा हो, असफलता के बाद ही सफलता मिलती है। लेकिन यह भी सच है कि जब असफलता होती है तो मन उदास हो जाता है। निराशा चारों तरफ छा जाती है। आज कुछ ऐसा मेरे साथ भी हुआ। मन को शांत व नकारात्मक सोच से दूर रहने के लिए शाम को लंबा वक्त बिताया, अपने पेड़ पौधों के बीच में, फिर भी मन हल्का नहीं हुआ। फिर सोचा कुछ लिखा जाए, लेकिन अब जब कुछ लिखने बैठी हूं। तो क्या लिखूं ? यही समझ में नहीं आ रहा है। फिर सोचा आप बीती ही लिख दू, जो जैसा महसूस कर रही हूं वैसा ही लिख दूं, तो शायद कुछ अच्छा लगे और सच में सब कुछ धीरे-धीरे अच्छा लग रहा है । जितनी पंक्तियां लिखती जा रही हूं उतनी ही उम्मीदें व आशाएं बढ़ती जा रही हैं। ना उम्मीदी व नकारात्मक सोच, मेरे आस-पास से छठता जा रहा है। सकारात्मक सोच नई उम्मीद को जन्म दे रही है और मुझे फिर से सफलता की तरफ मार्गदर्शन कर रही है।

धैर्य को आत्मसात करना

आज सुबह मुझे मेल आया कि मेरे BLOG को एडसेंस अप्रूवल नहीं मिला, तभी से मन उदास हो गया, अपने लेख पर भी गुस्सा आया, सोचती रही, पता नहीं कैसे सबको ऐडसेंस अप्रूवल मिल जाता है। फिर सोचा छोड़ो जाने दो क्या करना? ऐसे ही दिन भर अपने आप को कोसती रही और अपनी दिन भर असफलताओं को गिनती रही, लेकिन अब जब मैं लिखने बैठी हूं। मुझे अच्छा लग रहा है। आसपास जो नकारात्मक उर्जा मेरे द्वारा फैली थी, वह मेरे लिखने से कम हो रहा है। सकारात्मक सोच बढ़ रही है। फिर से एक बार कोशिश करने की उम्मीद बढ़ रही है। हालांकि यह तीसरी बार मैंने कोशिश कि थी। मेरा मानना है कि, हर चीज का अपना एक वक्त होता है। अभी मेरा समय लिखने का है, बहुत कुछ सीखने का है शायद अभी वह वक्त नहीं आया है मुझे इंतजार करना है। मुझे और अच्छा लिखना है। मुझे अपने पाठकों के परिवार का हिस्सा बनना है। अभी बहुत-सी असफलताओं का सामना कर सफलताओं का रास्ता ढूंढना है। धैर्य को आत्मसात कर जीवन में आगे बढ़ना है। धैर्य ही सफलता की कुंजी है।

जब मैंने लिखना शुरू किया था, तब मन कि हालत कुछ और था। अब मन कुछ और है। अब मन ऊर्जा व उत्साह से भरा हुआ है। फिर से संघर्ष के लिए तैयार हूं। हां यह सच है कि मेरे ब्लॉक पर ज्यादा ट्रैफिक नहीं आते, ना ही मेरी फैन फॉलोइंग लंबी है। लेकिन फिर भी अपने कर्म प्रति निष्ठा रखते हुए आगे बढ़ना है। कोशिश करना है। और नई ऊर्जा के साथ कोशिश करने के लिए तैयार हूँ।

शुक्रगुजार हूं

जिंदगी के द्वारा सिखाए गए पाठ, अपने अनुभवों को आपके सामने ज्यों का त्यों प्रस्तुत कर रही हूं। मैं उन सभी पाठकों का शुक्रगुजार हूं, जो मेरे BLOG को पसंद करते हैं। अपना कीमती समय मेरे BLOG पर व्यतीत करते हैं। मुझे रोज कुछ नया लिखने की हिम्मत देते हैं। मेरे कर्म ही मुझे, मेरी ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। मेरी असफलताएं ही मुझे सफलता का रास्ता दिखाएंगी। मैं फिर से सकारात्मक ऊर्जा के साथ तैयार हूं।

Disclaimer – यहां पर लिखी सभी post किसी भी धर्म, मानवता के विपरीत नहीं है। यह केवल सिर्फ मेरे विचार हैं। जो केवल reader को अपने विचारों से अवगत कराना है। मेरे विचारों से सहमत होना या ना होना यह उनके विचारों पर निर्भर करता है। यहां जो भी कंटेंट है उसके सारे copyright, neetuhindi.com के हैं।

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