फैशन सिखाता है, खुद से प्यार करना

फैशन करने से इंसान को, खुद से प्यार दुलार करने का वक्त मिल जाता है। उस वक्त वह सिर्फ अपने लिए जीता है। अपनी परवाह करता है। मुझ पर अच्छा लगेगा कि नहीं, मन सोचता है , घबराता है। आखिर मे ऐसे विचारों से मन चंचलता से भर जाता हैं, और कुछ नया करने की हिम्मत दे जाता है।

फैशन देता है खुद से प्यार करने का मौका

फैशन एक जरिया है, अपने आप को खुश रखने का, अपने आप को समय देने का, यह चेहरे पर चमक ला देता है । मैंने महसूस किया है। मैंने वो लम्हा जिया है, मेरी नानी जो बुजुर्ग महिला थी। एक दिन मैंने उनको पकड़ कर अच्छे से तैयार कर सजा दिया। मेरी नानी का चेहरा झुर्रियों के साथ खूबसूरत लग रहा था। वह सुंदर लग रही थी। उस दिन मुझे महसूस हुआ इंसान की खुशी कितनी छोटी छोटी चीजों में होती है। सारी जिंदगी कुछ बड़ी खुशियों के पीछे हम इंसान भागते रहते हैं।

टिकुली का फैशन

मैंने देखा कि मेरी नानी का माथा सुना लग रहा था। मैंने नानी के माथे पर बिंदी लगा दी, तो वह शरमा गई और ललचाते व अकड़ते आवाज से बोली ” यू फैशन हम का नीक नाय लागत है कोई देखहिए तौ का कहिये ” मेरे नानी कभी बिंदी नहीं लगाती थी। बस चंदन या सिंदूर से टीका लगा लेती थी। और हाँ एक बात मेरी नानी बिंदी को टिकुली कहकर इंगित करती थी । 60, 70 दशक के लोग शायद इसको टिकली ही कहते होंगे। जब पहली बार इसका नाम “टिकुली ” सुना तो हंसी रुक ही नहीं रही थी।

फैशन करनेेेेे से मिलती है खुशी

बिंदी लगाने का मेरी नानी को बहुत शौक था। लेकिन उस दिन उन्होंने उतार दिया था। अकेले में वही बिंदी चोरी छुपे लगाती और उतारती थी। चुपके से मैंने उनको अपने चेहरे को निहारते देखा। बिंदी को बार-बार अपने माथे पर छूते देखा। उनकी मंद मुस्कान को देखा। बिंदी से मेरी नानी का चेहरा खिल जाता था।

मैंने कभी प्यार से, तो कभी जबरदस्ती से, उनके माथे पर बिंदी लगाना शुरू किया। इस तरह मेरी नानी, धीरे-धीरे बिंदी लगाने लगी। मेरी नानी का फैशन सिर्फ एक बिंदी था। हालांकि कुछ महीने लग गए, लेकिन उनकी बिंदी लगाने की झिझक कुछ कम हुई थी। लेकिन हां जब भी गांव जाती थी, तो वह आज भी बिंदी लगाने से शर्मती थी।

एक वक्त ऐसा आया, जब मेरी नानी नहीं रही, नानी के मरने के बाद जब मैंने उनका बक्सा खोला, तब बक्से से ढेर सारे बिंदी के पत्ते मिले, मुझे बहुत ताज्जुब हुआ, यह जानकर कि एक बिंदी भी फैशन का जुनून बन सकती है। मेरी प्यारी नानी का फैशन एक बिंदी था। एक छोटी सी बिंदी, माथे का श्रृंगार था, किंतु नानी के लिए वह प्यार था।

फैशन का दायरा बड़ा

अब वह जमाना गया, जब लड़कियां ही फैशन कि दीवानी होती थी। आज फैशन लिंग का मोहताज़ नहीं रह गया है । फैशन को लेकर जन मे पूरी विचारधारा बदल गई है। अब फैशन किसी विशेष वर्ग या पूंजी पतियों की आंखों का सुरमा नहीं रह गया है। फैशन की नई रूपरेखा, नया अंदाज, हर वर्ग, क्षेत्र, यहां तक कि गांव देहात तक पहुंच गया है। फैशन की झांकी किसी भी आम तीज त्यौहारों में आसानी से देखने को मिल जाती है।

फैशन की कमाल की बात यह है कि, यह आम जनता में ट्रेंड के हिसाब से चलन में होता है। अब अगर फैशन का कोई स्टाइल प्रसिद्ध हो गया, फिर चाहे हेयर स्टाइल हो या कपड़े का स्टाइल हो या किसी आभूषण का स्टाइल हो, तो वह स्टाइल लोगों में अफवाहों की तरह बढ़ने लगता है। हां , अब फ़ूहड़ कोई नहीं कहता लेकिन आजकल फैशन में है, यह कहकर वाक्य को आगे बढ़ा दिया जाता है

फैशन सबके दिल में है

कई बार ऐसा होता है कि, किसी चीज का फैशन तो होता है, लेकिन फैशन करने से शर्मो हया, अपनी जकड़न से रोक लेता है, और चाहते हुए भी, हम फैशन नहीं कर पाते है। लेकिन आज का दौर ऐसा नहीं है। अब फैशन सबके घर और दिल में बस गया है।

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