आज के समय में मनुष्य स्वस्थ रहने के लिए हर चीज की दवा खाता है, चाहे वह खाना पचाने की दवा हो या प्रोटीन, आयरन की दवा हो, एक से एक फल और महंगे खाना खाता है। लेकिन थोड़ा बुखार से है मनुष्य बिस्तर पकड़ लेता है। और सिर्फ दो-तीन दिन बुखार में ही इंसान इतना कमजोर हो जाता है कि वह चलने फिरने में असहज महसूस करने लगता है। आज का शरीर सिर्फ दिखावे का शरीर है, अंदर से खोखला है, जो एक हल्की सी बीमारी भी बिस्तर पकड़ने पर मजबूर कर देती है। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह सिर्फ आज की आदतें और खान-पान है।

इस महामारी के बीच में सबसे बड़ी चुनौती यही है कि इस छुआछूत महामारी से कैसे बचा जाए, और अपने इम्यूनिटी सिस्टम को कैसे बढ़ाया जाए, तंग हालात से कैसे निकला जाए। इसके लिए बहुत कुछ करने की जरूरत नहीं है, बस जो मनुष्य ने बुरी आदतें को संभाल के रखा है , उसको कचरे में फेंकने की जरूरत है।

पहले क्या है? बुरी आदतें, एक-एक करके देखते हैं

देर तक सोना

रात में जल्दी सोना चाहिए वैसे आजकल फैशन है सोने का कोई टाइम नहीं है । जब मनचाहा सो गए, जब मन चाहा तो उठ गए, जो यह गलत बात है। रात में 9:00 या 10:00 बजे के करीब सो जाना चाहिए और सुबह 4:00 या 5:00 बजे के करीब उठ जाना चाहिए इससे मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहता है।

छोटे छोटे काम के लिए दूसरे पर निर्भर रहना

स्वस्थ रहने के लिए जरूरी नहीं है कि घंटों योगा करें या जिम करें । रोजमर्रा के काम व छोटे मोटे घर के काम खुद ही करें। इससे शरीर कि वर्जिस व कसरत दोनों हो जाती है। जैसे कि एक ग्लास पानी के लिए दूसरे पर निर्भर ना रहे , जितनी बार आप अपने काम के लिए खुद उठेंगे, खुद करेंगे, उतने ही शरीर आपका फुर्तीला बनेगा। घंटों कसरत के बाद भी छोटे छोटे काम के लिए दूसरे पर निर्भर रहना पड़े , जो गलत है । पानी लेना, दरवाजा खोलना, सामान उठाना यह सब, स्वयं करना चाहिए।

दुखी नहीं रहना चाहिए

ज्यादा मन को दुखी नहीं रखना चाहिए, किसी भी बात को दिल से नहीं लगा कर रखना चाहिए , इससे स्वस्थ शरीर में भी विकार पैदा हो जाता है। कहते हैं कि हरे भरे पेड़ पर ही चिड़िया रहती है, सूखे पेड़ को कोई पसंद नहीं करता इसलिए हमेशा खुश रहना चाहिए।

बाहर के खाने से परहेज करना चाहिए

बाहर का खाने में शुद्धता व स्वच्छता का अभाव रहता है, पता ही नहीं चल पता है कि वह ताजा भोजन है या एक-दो दिन पुराना है। इसलिय घर का खाना है अच्छा होता है । भोजन को बार-बार गर्म करने से, भोजन पौष्टिक नहीं रहता, इसलिए हमेशा ताजा भोजन करना चाहिए।

आलस्य

आजकल सभी को पता है कि सुबह की शुरुआत गुनगुन पानी से करना चाहिए, ज्यादा ठंडे और गर्म पेय पदार्थों से दूर रहना चाहिए, पेय योग्य पदार्थ का सेवन हमेशा बैठकर करना चाहिए। यह स्वास्थ्य के लिए हितकर होता है। इससे घुटनो के दर्द से बचा जा सकता है।

खान पान कैसा हो

सुबह का नाश्ता राजा के जैसे दोपहर का खाना प्रजा के जैसे, रात का भोजन फकीरों के जैसे

यह कहावत बहुत मशहूर है और इस कहावत में ही सारे चरण बता दिए गए हैं , कि भोजन किस तरह का होना चाहिए, और किस तरह का भोजन कब करना चाहिए।

नाश्ता

नाश्ता हमेशा करना चाहिए । नाश्ता जितना मजबूत होगा, सारा दिन ऊर्जा उतनी ही बनी रहेगी । नाश्ते में कुछ भी लिया जा सकता है । भीगे हुए चने अंकुरित दाने अंडे फल दूध और केला आदि।

दोपहर का खाना

दोपहर के खाने में अपनी इच्छा अनुसार दही, दाल, चावल, सब्जी थोड़ा मसालेदार भोजन कर सकते हैं । भोजन करने के तुरंत बाद कभी लेटना नहीं चाहिए या सोना नहीं चाहिए क्योंकि इससे शरीर भारी हो जाता है । इसीलिए इस तरह का भोजन दिन में रखा गया है क्योंकि मनुष्य दिन में कम ही आराम कर पाता है । ज्यादातर वह चलता फिरता रहता है , जिसके कारण भोजन को पचने में मदद मिलती है।

रात का भोजन

रात का भोजन हमेशा बहुत हल्का होना चाहिए। अपने कार्य व क्षमता के अनुसार भोजन करना चाहिए। अगर उम्र 40 के पार हो जाती है, तो अन्न का सेवन कम या नहीं करना चाहिए। अगर टहलते ना के बराबर है तो साग, सब्जी और फल से ही काम चला लेना चाहिए कोशिश यही करनी चाहिए कि रात का खाना जल्दी हो जाए, अन्यथा देर रात भोजन करने में स्वास्थ्य क्रिया खराब भी हो सकती है।

ज्यादा नशे से संभंधित पदार्थो का सेवन नहीं करना चाहिए, ये शरीर के अंगों को नुकशान पहुँचता है। भोजन हमेशा शरीर के विकास के अनुरूप है करना चाहिए।

इन सब से भी जरूरी बात यह है कि, अपने मन को हमेशा प्रसन्न रखना चाहिए । वह कहावत है नामन चंगा तो कठौती में गंगा “ इसीलिए जब मन स्वस्थ होगा तो शरीर खुद-ब-खुद स्वस्थ हो जाएगा। बस ! खुश रहिए और अपनी मुस्कुराहट से सबको खुश रखिये।

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