शादी करना हर युवक युवती की इच्छा होती है। शादी के सपने एक लड़की बचपन से ही सजोने लगती है, और अपनी शादी से ना जाने कितनी उमीदें, आशाएं जोड़ लेती है। बहुत सी ऐसी लड़कियां होती हैं, जिनका AIM ही होता है शादी करना , तथा वह शादी के बाद HOUSEWIFE बनना , और अपने पति या ससुराल का सहयोग बनना पसंद करती है ।

शादी को लेकर सपने सजोना

शादी को लेकर लड़कियां ऐसे सपने सजाने लगती हैं, जिनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता है। एक लड़की शादी के बलबूते पर अगर अपनी पहचान व खुशियों का दामन चुनती है, तो उसकी कोई गारंटी नहीं है कि, जो उसने सपने देखे हैं, वह सच भी होंगे या नहीं। और जब वह सपने सच नहीं होते, तब लड़ाई, झगड़ा व तलाक की नौबत आ जाती है।

सात जन्मों का रिश्ता

शादी एक खूबसूरत पहलू है, और लड़कियों का हक है, कि अपनी शादी को लेकर सपने सजाए। प्रत्येक लड़की भली भांति जानती है, कि उसे शादी करके दूसरे घर में जाना है। उसे एक नई दुनिया बसानी है। शायद इसीलिए एक त्यौहार की तरह शादी मनाया जाता है। शादी ब्याह दो परिवारों का मेल होता है। हिंदू समाज में शादी कोई COMMITMENT या परिवार को बढ़ाने का केंद्र नहीं होता है। हिंदू रीति रिवाज में शादी तो दो आत्माओं का मिलन है। जो सात जन्मों का रिश्ता होता है।

तलाक आसान नहीं

शादी एक पर्व की तरह मनाया जाता है । इसलिए शायद हिंदू समाज में तलाक का स्थान ना के बराबर होता है। हिन्दू विवाह, एकल विवाह पर ही जोर देता है । इसिलए हिन्दू समाज मे तलाक़ बहुत कठिन परिस्थितियों मे है होता है। हिन्दू विवाह मे, तलाक़ लेना आसान नहीं होता है।

शादी विवाह के बाद अगर लड़की को ससुराल समझ में नहीं आता है। या जिसके कारण लड़की नहीं रहना चाहती है। जैसे पति का शराबी होना, शराबी हो कर मारपीट करना, पति की खराब आदतें, वगैरा-वगैरा । इस तरह के कारणों की वजह से भी तलाक की नौबत आ जाती है।

तलाक की नौबत क्यों आती है

आज की पीढ़ी में देखा जाए तो अरेंज मैरिज में भी तलाक होता हैं, जितनी कि लव मैरिज में होता हैं। सब कुछ तो सामान है लड़का लड़की मे कोई भेद नहीं होता है। फिर ऐसा क्या होता है?, कि पहले के जमाने की तुलना में अब तलाक ज्यादा होते हैं । चलिए एक एक करके समझने कि कोशिश करते हैं। पहले नंबर पर आता है अरेंज मैरिज

अरेंज मैरिज

अरेंज मैरिज में सब कुछ तो सब की मर्जी से होता है। अर्रेंज मैरिज मे सब की खुशी का ध्यान रखा जाता है । शादी आबाद रहे, इसके लिए ढेर सारी रीति – रिवाज, रश्म , दान – दहेज ना जाने कितने कार्यक्रमों का आयोजन होता है। सब कुछ देखा परखा होता है। फिर ऐसा क्या होता है?, कि नौबत तलाक़ तक आ जाती है। हाँ यह सत्य है, कि लव मैरेज के अपेक्षा यहाँ तलाक़ कम होते है। लेकिन यह भी सत्य है कि, घरेलू हिंसा, अपराधिक भावनाएं, अपमान की भावना आदि लव मैरिज के अपेक्षा अधिक होती है । वास्तविकता में यह सत्य भी है और आश्चर्य की बात भी है। अब देखते हैं कि ऐसा क्या होता है?

लड़की के घर वाले ना जाने कितने रिश्ते को रिजेक्ट करके अपनी लड़की के लिए एक अच्छे से अच्छा रिश्ता देखते हैं । औकात से ज्यादा हो तो भी रिश्ता जोड़ने से गुरेज नहीं करते, तू क्या लड़की के मां-बाप से यही चूक हो जाती है । क्या यही कारण बनता है जिस से संबंध विच्छेद हो जाता है ?

सामंजस्य बैठाना

और भी कई वजह होती होंगी जिनसे की जोड़े आपस संतुष्ट नहीं होते होंगे, लेकिन अगर अरेंज मैरिज की बात करें तो इसमें कई बार ऐसा देखा गया है कि ना चाहते हुए भी जोड़ें साथ में रहते हैं, अगर बात महिला कि करें, तो उसकी मन की व्यथा क्या होती होगी? जिसके कारण वह संबंध विच्छेद नहीं कर पाती, शायद वह दो परिवारों को जोड़ने में लग जाती होगी। पति की इज्जत , मायके की इज्जत, लोक लज्जा, शर्म बहुत ऐसे कारण हैं, जिसके कारण महिलाएं चाह कर भी दहलीज नहीं पार कर पाती, उसी कशमकश में पूरी जिंदगी बिताने का फैसला कर लेती हैं । कुछ इसी विचार पर यह पंक्ति प्रस्तुत है।

ना जिंदगी कम है ना आंसू कम है,

बस फंसे ऐसे मझधार में है जहां,

ना पानी कम है ना आग कम है,

कम है तो बस एक उम्मीद का जरिया ।।

घुंघट में शर्मो हया समेट के बैठी हूं,

कमजोर नहीं, बस इज्जत को डरती हूं,

अपने पे आउ तो, सबकी लुटिया डूबा सकती हूं,

बस दो घरों की इज्जत हूं,

इसलिए सर झुका कर चलती हूं ।।

अल्हड़ से परिपक्व की तरफ कदम बढ़ाना

मुझे ऐसा लगता है कि अरेंज मैरिज में जरूरी नहीं कि सब कुछ अच्छा ही होता है। लेकिन शादी ब्याह में इतने लोग आते हैं। रिश्तेदार आते हैं। जिनसे ना चाहते हुए भी जोड़े सामाजिक परिवेश में ढल जाते हैं। और लोक लज्जा का बोझ उठाने लगते हैं। धीरे – धीरे वो इसका हिस्सा हो जाते है, शायद यही कारण होता होगा, जिससे कि अरेंज मैरिज की महिलाएं, चाह कर भी संधि विच्छेद नहीं कर पाती है। वैसे तो लव मैरिज में भी समाज पुरुष प्रधान है, और अरेंज मैरिज में भी समाजपुरुष प्रधान है। पुरुषों की स्थित ज्यादातर दोनों जगह एक समान ही होती है। तो सारा दारोमदार तो महिलाओं पर ही होता है। महिलाओ कि स्थिति बदलती है एक बेटी से बहू बनती है, धीरे धीरे अल्हढ़ से परिपक्व कि तरफ बढ़ती है,

अल्हढ़ से परिपक्वक़ क़ दरम्यान उसे कई चुनौतीयों का सामना करना पड़ता है। यही चुनौती उसकी नीव मजबूत करती है। इस चुनौती मे कोई पास होता है तो कोई फेल, और फेल का रास्ता सम्बन्ध विच्छेद कि तरफ बढ़ता है।

बड़े बूढ़े परिस्थितियां संभाल लेते हैं

अगर कभी संबंध विच्छेद की बात आती है , तो अरेंज मैरिज में इतना बुता होता है की, दोनों के परिवार के मुखिया सब कुछ संभाल लेते हैं । और घर को टूटने से बचा लेते हैं। बड़े बूढ़े या अनुभवी लोग रिश्तो मे फिर से मिठास भार देते है।

लव मैरिज और सपने

लव मैरिज सपनों की दुनिया होती है, लव मैरिज के केस में लड़कियां कुछ ज्यादा टीवी सीरियल या मूवी को देखकर उड़ान भरने लगती हैं। क्योंकि एक बात तो अच्छे से समझनी होगी, कि हमारा समाज पुरुष प्रधान है, तो पुरुष की मानसिकता तो एक ही होगी, चाहे वह अरेंज मैरिज वाले पुरुष की हो या लव मैरिज वाले पुरुष की हो, इसीलिए पुरुष ज्यादातर निश्चित रहते हैं और महिलाएं अनिश्चित रहती हैं। जिसका भुगतान उन्हें शादी के बाद उठाना पड़ता है।

लव मैरिज करने वाली महिलाएं सपने अधिक देख लेती हैं। उन्हीं सपनो के मुताबिक सब कुछ सच करना चाहती है। शायद इसीलिए शादी के बाद वह दखलअंदाजी किसी की पसंद नहीं कर पाती है। शायद इसिलए उनका सपना टूटने लगता है।

हकीकत से रूबरू होना

  • और तो और कुछ महिलाएं पुरुष की औकात देखकर सिर्फ शादी करना चाहती हैं, और कुछ तो महगे कपड़े, पैसे, रंग रूप देखकर लड़कों की औकात व हैसियत देखकर शादी करती हैं । अंततः असलियत सामने आने पर संबंध विच्छेद की नौबत आ जाती है।

  • दूसरा कारण यह भी होता है, कि कुछ महिलाएं प्यार को कम ऐसो आराम को ज्यादा तवज्जो देती हैं, संघर्ष के दिन को देखकर घबरा जाती है, और संबंध विच्छेद कि तरफ अपना कदम बढा देती हैं।
  • आखिर मे और सबसे महत्वपूर्ण कारक है, की लव मैरिज करने वाली ज्यादातर महिलाएं एकल घर में रहना चाहती हैं। वह संयुक्त परिवार को संभालने में असमर्थ होती हैं । तथा संयुक्त परिवार का विरोध कर अलग रहने को प्राथमिकता देती हैं ।

अब यह कैसे संभव हो सकता है, कि भारत जैसे देश में रिश्तो और संबंधों का महत्व न दिया जाए। यहां पर रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपने से ज्यादा दूसरे की खुशी कि अहमियता रखते है।

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One thought on “शादी ब्याह और तलाक़”

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