Wednesday, May 12, 2021
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दुःख जब सहा न जाये….

जिंदगी कई बार ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर देती है ।जैसे लगता है कि हम फंस गए हैं ।परेशानी का हल अब नहीं निकल सकता है । सभी दरवाजे बंद लगते हैं । हारा हुए मन को बोझ  जैसी जिंदगी लगती है ।जिससे सब ठीक हो जाए । हल कैसे निकाले ? ना कोई हमारी तकलीफ या दर्द को समझता है और ना ही किसी को परवाह होती, और ना है कोई सुध लेता है ।

किसका, दिल दुःखा दिया

कमाल की बात तो तब होती है । जिससे हम लोग उम्मीदें रखते हैं, जब वही लोग सबसे पहले हमसे दूर भागने लगते हैं या दूर जाने का बहाना ढूंढ ने लगते हैं  ।फिर हताश होकर यही सोचना पड़ता है कि आखिर जिंदगी में अपना कौन है? या मैंने कौन सा पाप किया या  मैंने किस का दिल दुखा दिया या फिर ऐसा कौन सी गलती कर दी है । जिसके कारण इतना कष्ट झेलना पड़ता  है।

दुख में विचरण

सच्चाई तो यह ह कि जब हमारी जिंदगी में कोई दुख तकलीफ आता है ।तब सबसे ज्यादा हमारा ध्यान उस दुख तकलीफ के बारे में ही ज्यादातर विचरण करने लगता है ।उस एक दुख के घेरे में इतने घिर जाते हैं कि उससे निकलने के हजारों रास्ते ढूंढने लगते हैं ।  निराशा में इतने घिर जाते हैं कि हमें याद ही नहीं रहता कि हमारी जिंदगी ने कितना कुछ अच्छा दिया है ।

आंखों में आंसू पर रोया नहीं जाता

कितनी बार ऐसा होता है ।जब जिंदगी के उतार-चढ़ाव में कुछ गलतियां हो जाती हैं। तब उस उतार-चढ़ाव को अनदेखा कर अपने ही लोग बाणों की बौछार करने लगते हैं। इतना दुख तकलीफ देते हैं कि आंख में आंसू भरे रह जाते हैं ।पर निकल नहीं पाते हैं ।आंख में आंसू होने के बावजूद होठो पर मुस्कान रखना पड़ता है ।जब अपने ही तीखे बाणों के बाण चलाते हैं। तो दूसरों के जख्म भी फीके लगते हैं।  मुझे लगता है यह आम बात है हर कोई ऐसी स्थिति से गुजर चुका होता है तथा रिश्ते संबंधों में कटाक्ष करने वाले व्यक्ति मिल ही जाते हैं जो कहने को अपने होते हैं पर काम गैरों वाला करते हैं ।

इनका सिर्फ एक ही तरीका है कि इनकी बातों अपनी नाकामी को एक ही स्थान दें और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इनकी सकारात्मक बातों को प्रेरणा मानकर आगे बढ़े और जो अन्यथा लगे कचरे के डिब्बे में उसको स्थान दें ।

जिंदगी में ना जाने कितनी बार ऐसा होता है ।जब हम सोचते हैं कि हमारे दुखों के दिन कब हटेगे, कब दुखों के बादल छाटेंगे, आखिर कब अच्छे दिन आएंगे  ।जब लगता है सब ठीक हो जाएगा । तभी फिर कोई ना कोई उलझन सामने आकर खड़ी हो जाती है और दुख मुँह चिड़ाने लगती है और हम अपना सा मुंह लेकर खड़े रह जाते हैं । जहां तक मुझे लगता है  । चार कारण है जिनकी वजह से हमें दुखों का सामना करना पड़ता है । अगर हम इन चार कारणों को समझे तो काफी हद तक दुखों से छुटकारा पाया जा सकता है

रिश्तो की वजह से दुख

रिश्तो की वजह से दुख होते हैं ।जब रिश्तो में धोखा मिलता है। दिल बहुत दुखता है ।अपने होकर भी अपने ही चोट पहुंचाते हैं। और आश्चर्य की बात यह होती है ।जो हमें निस्वार्थ प्रेम करते हैं। हम उन्हें के प्रेम को बिसरा देते हैं। उन सभी प्रेम में से एक प्रेम मां-बाप का होता है ।जो कुछ भी नहीं मांगते हैं हमसे, अगर मांगते हैं तो सिर्फ हमारी मुस्कुराहट है और हम सब उनकी इस मांग को नजरअंदाज कर आगे बढ़ जाते हैं ।

धन का दुख

दूसरा दुख धन का होता है। बहुत लोग धन की वजह से परेशान रहते हैं। कभी काम ठीक नहीं चलता, कभी धन की हानि हो जाती है। धन ना हो तो भी दुख होता है ।अगर धन होता है तो भी दुख होता है। धन को कमाने के लिए दिन-रात इंसान मेहनत करता है ।उसके पीछे भागता है और अगर धन होता है तो धन छोड़कर सभी तरह के दुःख, परेशानियां उसके जीवन के सामने आकर खड़ी हो जाती हैं ।

सेहत का दुख

धन अगर अधिक हो तो सेहत जरूरी नहीं कि अच्छी होगी ( सेहत रिश्ते प्यार) आदि दुख कतार में लगे रहते हैं । धन है, पर सेहत नहीं है । तो कैसे बेहतर जीवन जिएंगे, इतनी बीमारियां वर्तमान मे उपस्थित हैं । धनी व निर्धानी दोनों को करना पड़ता है । जिसकी वजह से धन का वह वव्य, दवाओं पर ही हो जाता है ।  सेहत है, तो सब है, सब रंग है, वरना सब फीका – फीका रह जाता है ।

मन का दुख

जो सबसे बड़ा दुख होता है। वह मन का दुख होता है। जब हम बाहरी परिस्थितियों को खुद से जोड़ लेते हैं तो दुखों का आरंभ हो जाता है। तब मन वा इच्छाएं हमारे दुखों का कारण बनती हैं ।मन को वश करना दुखों का अंत  करने के समान होता है । दुख मन की इच्छाओं पर निर्भर करते हैं इसीलिए मन का संतोष करना जरूरी हो जाता है ।

मन को संतोष कर, मन को मजबूत करना जीवन को उच्चतम स्थान देने के बराबर होता है ।वह कहते हैं ना कि मन का हारना यानी सब कुछ हारना है । इसीलिए कभी भी दुख चाहे जितना भी बड़ा हो मन से कभी हार नहीं माननी चाहिए । जीवन संघर्षो भरा होता है । इसलिय हार को दरकिनार कर पुनः प्रयास करने में लग जाना चाहिए । यही तो जिंदगी है ।

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