Wednesday, May 12, 2021

उलझने (जिंदगी कि )

उम्र के साथ जिंदगी अपने आयाम बदलती रहती है ।कभी दुखो का सिरा मिलता है,तो कभी उलझन में ही गुम हो जाता है । ऐसे ही जिंदगी अपने रंग बदलती रहती है ।

आयाम जिंदगी के

हम चाहे जितने भी आशावादी हो लेकिन उलझन, परेशानियां हमे हमेशा अपनी गेरीफ्त  मे लेना चाहते हैं,  और बार-बार हमारी आशावाद व्यवहार पर प्रहार करते  रहते  हैं ।यह सिलसिला तब तक चलता रहता है जब तक हम टूट नहीं जाते है, हम बिखर  नहीं जाते हैं या  हम अपनी उम्मीद खत्म नहीं कर देते है । सच तो यह कि इसी का नाम जिंदगी है, जो कभी रुकती नहीं, थमती नहीं है ।बस पल पल अपने नखरे देखाती रहती है जिसको झेलना हमी को पड़ता है क्योंकि एकलौते हमी है जो अपनी जिंदगी को बहुत प्यार करते है । कुल मिलाके इन सब का सार यही है कि हमें हमेशा आशावाद का दामन पकड़े रहना चाहिए और एक आत्मविश्वास के साथ हमेशा आगे बढ़ते रहना चाहिए ।

उलझने,परेशानियां तो आती-जाती रहेंगी लेकिन इन परेशानियों से घबराकर अपने सफर को कभी अधूरा नहीं छोड़ने कि सोचना चाहिए । हमें कभी निराश नहीं होना चाहिए। हमें हमेशा अपनी परेशानियां व चुनौतियों का सामना खुद करना चाहिए ।यह हमें मजबूत बनाता है। फिर चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक ।दोनों तरह से हमें संतुलन बनाए रखने में मदद करता है ।परेशानियां चुनौती हमें आगे आने वाली परेशानियों से लड़ने की ताकत देता है । सच्चाई तो यह है कि जब तक हौसला होता है ।तब  तक हर मंजिल आसान होती है ।  इसलिए हमेशा शांत मन से विचार कर आगे बढ़ना चाहिए । और हमेशा अपने आप को हर बार एक और मौका देना चाहिए ।

बुरे वक्त के दौर में घेरती है परेशानियां

जिंदगी लंबी होती है इसलिए जिंदगी को कभी निराश होकर वक्त नहीं काटना चाहिए।  और हमेशा यह समझना चाहिए कि जिंदगी में अलग-अलग रंग होते हैं और हर रंग बहुत ज्यादा खूबसूरत होता है। इस जिंदगी के लंबे सफर में अलग-अलग पढ़ाव  आते हैं । जो हमें हर पड़ाव में ढेर सारे अनुभव देकर जाते हैं ।अनुभव अच्छे और बुरे दोनों हो सकते हैं।

निश्चिंतता का वक्त 

बचपन की परेशानियां अलग होती हैं, मनमुटाव, गुस्सी गुस्सा  अलग होते हैं ।वह दौर ऐसा होता है कि बचपन कभी अपना अच्छा बुरा नहीं सोचता है । इसलिए बचपन हमेशा जिद और माँ – बाप  के प्यार में गुजर जाता है ।  बचपन इतना स्वार्थी होता है कि वह अपनी सारी परेशानियों का भार अपने बड़ों के कंधो  पर छोड़ देता  हैं और खुद खेलों में व्यस्त हो जाता  हैं । यह भी एक जिंदगी का भाग है जो निश्चिंत और आराम की जिंदगी  बिता कर जाता है ।  बचपन चाहे जैसा भी हो मां के साए में हमेशा अच्छा गुजर जाता है

सब परिवर्तनशील है 

हर व्यक्ति के जीवन में बुरा वक्त कभी ना कभी आता है ।उसको चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और हमेशा यह याद रखना पड़ता है कि कभी  वक्त एक जैसा नहीं रहता है ।रोज वक्त बदलता रहता  है । वक्त हर पल बदलता रहता है। हर क्षण बदलता रहता है । परिवर्तन ही जीवन का मूल मंत्र है ।इसलिए कभी अगर निराश हो भी जाते हैं तो” परिवर्तन ही नियम है ” यह याद कर संतुष्ट हो जाना चाहिए कि –

आज है मैं है कल थे में हो जाएंगे

जमीन के फूल की तरह मुरझा जाएंगे

आज सावन है तो कल पतले हो जाएंगे

और,और इस तरह अपने मन को तसल्ली दे देनी चाहिए कि कुछ भी स्थाई रूप नहीं है ।सब परिवर्तनशील है । अरे ! जब हमारी काया स्थाई रूप नहीं  रह सकती है तो फ़िर यह कठिन वक्त कैसे स्थिर रह सकता है । वक्त के साथ – साथ ज़ब कभी हमारे भाव स्थिर नहीं रहते हैं तो फिर यह कैसे हो सकता है कि बुरा वक्त एक समान रहे, उसका भी विघटन होगा । वह भी क्षणिक है। उसका भी परिवर्तन होगा ।  और यह काल के गर्भ  में समाया है। यह निश्चित है । जिसे कोई नहीं बदल सकता ।

आशावाद का बीज

हमें हमेशा अपने विचारों में आशावाद का बीज रोपण रखना चाहिए और जैसे आशावाद का बीज फलता फूलता जाएगा । वैसे ही आप इस जीवन और प्राकृतिक के नियम से धीरे-धीरे परिचित होते जाएंगे और अपने जीवन को समझने में सक्षम होते जाएंगे। इस तरह से आप को कोई भी दुख तकलीफ बहुत देर तक ना परेशान कर पाएगी और ना ही विचलित कर पाएगी । मेरा मानना है कि अगर किसी चीज का प्रश्न होता है ।तो उसका उत्तर अवश्य होता है । इस लिए मन में आशा की आस्था जगाए रखना ही जीवन का सरल व सरस मंत्र है ।

परेशानियां चाहे जैसी भी हो उसका सामना आप ही को करना पड़ता है ।हर परेशानी का निर्णय आप ही को लेना पड़ता है । फिर कभी ऐसा होता है कि कुछ लोग परेशानियों की उलझन में फंस जाते हैं ।जबकि सच्चाई भी यह होती है कि परेशानियां भी व्यक्त की खुद की बनाई होती हैं और उस कि उलझने भी खुद की बनाई होती हैं । इसलिए व्यक्ति को हमेशा उन कठिन समय में धैर्य से काम लेना चाहिए ।उसे कोशिश करनी चाहिए कि वह सही वक्त का इंतजार करें । तब तक व्यक्ति को इस दरमियान अपने आप को मजबूत करना चाहिए और अपने  संकल्पित लक्ष्य कि  तरफ आगे  बढ़ते रहना चाहिए ।

उलझने

उलझनों  के साए में जिंदगी गुजर गई,

 कभी सुबह से शाम,तो कभी रात से सुबह हो गई।।

 ऐसे ही कई दिन पतझड़ो के नाम हो गई,

 अनुभवों के साथ उलझनें बढ़ती गई,

 कभी चाहा एकांत में सुलझाऊ  बैठकर

 लेकिन लछो की तरह जिंदगी और उलझ गई।।

 ज़ब कभी एक सिरा पकड़ा तो,

कम्बक़्त वह भी नाजुक निकला,

  आह भर कर,अपना समझ कर,

फिर से उसी में लिपटा दिए।।

 गैरों का भी दोष सर झुका कर मान लिया,

 टूट ना जाए कहीं बीच  से सिरा,

 इसलिए उलझन को भी छोड़ कर निकल लिए,

 कुछ ना जानकर अनजान रह गए,

 दूसरों के नजरों में बेवकूफ बन गए,

यही जिंदगी जीने में सरल लगी,

 सो ऐसे हीं उलझनों को गुलजार कर लिए।

 और अपने चेहरे पर मुस्कुराहट बरकरार कर लिए।।

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